Author Archives: François Gautier

THE HEROES OF KARGIL

After Azam Khan said that ” Those, who defended Kargil, were not Hindus; they were Muslims.”, I thought it would be interesting to publish the list of those Indian soldiers who died in Kargil. My heart goes out to them; for it was the death of heroes in the face of impossible challenges, giving their lives for Mother India, which so many Indian intellectuals, journalists and politicians have so little love for. Fgautier
INDIAN SOLDIERS WHO DIED IN THE KARGIL WAR

Officers ( Indian Army)

Lt. Col. Vishwanathan
Lt. Col. Vijayaraghavan
Lt. Col. Sachin Kumar
Major Ajay Singh Jasrotia
Major Kamlesh Pathak
Major Padmapani Acharya
Major Marriapan Sarvanan
Major Rajesh Singh Adhikari
Major Harminder Pal Singh
Major Manoj Talwar
Major Vivek Gupta
Major Sonam Wangchuk
Major Ajay Kumar
Captain Amol Kalia
Captain Kieshing Clifford Mongrum
Captain Sumeet Roy
Captain Amit Verma
Captain Pannikot Visvanath Vikram
Captain Anuj Nayyar
Captain Vikram Batra
Dy. Commandant Joy Lal ( BSF)
Captain Jintu Gogoi
Lt. Vijayant Thapar
Lt. N Kenguruse
Lt. Hanif-U-Din
Lt. Saurav Kalia
Lt. Amit Bhardwaj
Lt. Balwant Singh
Lt. Manor Kumar Pandey

Officers ( Indian Air Force )

Squadron Leader Ajay Ahuja
Squadron Leader Rajiv Pundir
Flt. Lt. S. Muhilan
Flt. Lt. Nachiketa Rao
Seargent PVNR Prasad
Seargent Raj Kishore Sahu

Junior / Non-Commissioned Officers ( Indian Army )

Naik Chaman Singh
Nair R. Kamraj
Naik Kuldeep Singh
Naik Birendra Singh Lamba
Naik Jasvir Singh
Naik Surendra Pal
Naik Rajkumar Punia
Naik S N Malik
Naik Surjeet Singh
Naik Jugal Kishore
Naik Suchha Singh
Naik Sumer Singh Rathod
Naik Surendra Singh
Naik Kishen Lal
Naik Rampal Singh
Naik Ganesh Yadav
Havaldar Major Yashvir Singh
Lance Naik Ahmed Ali
Lance Naik Gulam Mohammed Khan
Lance Naik M.R. Sahu
Lance Naik Satpal Singh
Lance Naik Shatrughan Singh
Lance Naik Shyam Singh
Lance Naik Vijay Singh
Naik Degendar Kumar
Havaldar Baldev Raj
Havaldar Jai Prakash Singh
Havaldar Mahavir Singh
Havaldar Mani Ram
Havaldar Rajbir Singh
Havaldar Satbir Singh
Havaldar Abdul Karim
Havaldar Daler Singh Bahu
Subhedar Bhanwar Singh Rathod
Rifleman Linkon Pradhan
Rifleman Bachhan Singh
Rifleman Satbir Singh
Rifleman Jagmal Singh
Rifleman Rattan Chand
Rifleman Mohammed Farid
Rifleman Mohamad Aslm
Rifleman Yogendra Singh
Rifleman Sanjay Kumar

SEPOYS ( INDIAN ARMY )

Genadier Manohar Singh
Gunner Uddabh Das
Sepoy Amardeep Singh
Sepoy Vijay Pal Singh
Sepoy Virendra Kumar
Sepoy Yashwant Singh
Sepoy Santokh Singh
Sepoy Dinesh Bhai
Sepoy Harendragiri Goswami
Sepoy Amrish Pal Bangi
Constable Surjan Bhan ( BSF)
Sepoy Lakhbir Singh
Sepoy Bajindra Singh
Sepoy Deep Chand
Sepoy Dondibha Desai
Sepoy Keolanand Dwivedi
Sepoy Harjindra Singh
Sepoy Jaswant Singh
Sepoy Jaswinder Singh
Sepoy Lal Singh
Sepoy Rakesh Kumar ( RAJ)
Sepoy Rakesh Kumar ( Dogra)
Sepoy Raswinder Singh
Sepoy Bir Singh
Sepoy Ashok Kumar Tomar
Sepoy R. Selvakumar

Aside

As most of the British correspondents in India, whether, the Guardian, the Economist, or the Telegraph, seem to be giving lessons to India in democracy, while writing intensely hostile articles on Narendra Modi, I thought it would be timely to … Continue reading

THE EMPRESS OF INDIA (HINDI)

भारतवर्ष की महारानी
लेखक : फ्रांकोइस गुतिअर
अनुवादक: रवि शंकर
सोनिया गाँधी की ही तरह मैं भी यूरोप से हूँ और उन्ही की तरह एक केथोलिक परिवार मैं मेरा जन्म और पालन-पोषण हुआ है | मेरे भलेमानस पिता बहुत ही मजबूत आस्था वाले केथोलिक ईसाई थे और मेरे चाचा जी जिनका मेरे ऊपर घनिष्ठ प्रेम और मेरे व्यक्तित्व पर बहुत प्रभाव रहा पेरिस (फ़्रांस) के मोंटमारट्रे चर्च जो पेरिस के सबसे सुन्दर और एतिहासिक स्थलों मैं से एक है के वाइसर (प्रबंधक) थे| सोनिया गाँधी की ही तरह मुझे भी भारत मैं ४० वर्ष से ज्यादा रहने और एक भारतीय से विवाह करने का सोभाग्य मिला है |
पर मेरा और सोनिया गाँधी की समानता यंही खत्म होजाती है | मैं ये स्वीकार करूँगा के जब मैं सबसे पहले भारत आया था तो अधिकाँश पश्चिमी पर्यटकों और यात्रियों की तरह एक सीमा तक भारत के प्रति कुछ पूर्वाग्रहों, मान्यताओं और भ्रांतियों से ग्रसित था | और अन्य पश्चिमी यात्रियों की तरह मेरी जानकारी भी कुछ किताबो और प्रचिलित मान्यताओं (जैसे टिनटिन, रुडयार्ड किपलिंग की जंगलबुक, सिटी ऑफ जोय [कलकत्ता पर लिखी प्रसिद्द किताब], और आजकल स्लमडोग मिलियनेयर फिल्म) पर आधारित थी और चूँकि मैं ईसाई पुजारियों/मिशनरियों के परिवार से आता हूँ मैं अपने युवावस्था के उत्साह मैं ईसाई मिसनरी बनने और भारतीय ‘पगानो’ (मूर्तिपूजकों / नास्तिकों) को ‘सच्चे इश्वर’ (इसा मसीह) के रास्ते पर लेजाने का सपना भी रखता था| पर जब मैं भारत भूमि पर पैर रखे तभी मुझे महसूस हुआ के मेरे पास भारत को देने को कुछ नहीं है पर ये भारतभूमि और इसकी संस्कृति है जो मुझ पर अपनी कृपा की बोछार कर रही है |
पिछले ४० वर्षों मैं भारतभूमि ने भावनात्मक, आध्यात्मिक और व्यावसायिक तौरपर मुझे बहुत कुछ प्रदान किया है | हालाँकि अधिकांश पश्चिमी जो भारत आते हैं अभी भी यही सोचते हैं के वो भारत का ‘उद्धार’ करने, इसे कुछ देने आये हैं जो अवश्य ही अनजाने मैं अपने ‘अवचेतन’ मन मैं मानते है के भारत उनकी मात्रभूमि से हीन है कमतर है और ये तथ्य जितना ब्रिटिश राज्य या मदर टेरेसा के लिए सत्य है उतना ही श्रीमती सोनिया गाँधी के लिए भी |
इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता के श्रीमती सोनिया गाँधी ने कांग्रेस पार्टी मैं अनुशाशन व्यवस्था स्थापित की है और पार्टी को जोड़े रखा है पर एक गेर-भारतीय और लोकसभा के ५४५ सांसदों मैं से एक के हाथों मैं सत्ता के सूत्र और इतनी शक्ति का होना एक भयावह स्थिति है हालात ये हैं के सोनिया के एक शब्द बोलने या नजर टेड़े करने पर कांग्रेसी कुनबा और भारत सरकार मैं उनके अनुयायी कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं इसका परिणाम ये हुआ है के भारतीय लोकतंत्र मैं कार्यपालिका कभी भी इतना विकृत और पथभ्रष्ट नहीं हुई जितना वर्तमान समय मैं हो गयी है |
इसी सत्ता के केंद्र के सोनिया गाँधी मैं निहित होने का परिणाम है के सीबीआई खुलेआम और बेशर्मी के साथ राजीव गाँधी के दोस्त इटालियन नागरिक ओक्ट्वियो कव्त्रोच्ची के खिलाफ सारे अदालती निषेध आदेश रद्द करवा देती है आरोप वापस लेती है और उसे उन अरबों रूपये ले के भाग जाने देती है जो उसने भारत से चुराए थे इतना सब होने के बाद भी भारतीय मीडिया अपनी पलक भी नहीं झपकता और इस सब से आंख मीच के नरेन्द्र मोदी के पीछे निर्ममता पूर्वक पड़ा है जो भारत की सबसे सक्षम, भ्रस्टाचार मुक्त राज्य सरकार गुजरात मैं चला रहे हैं जंहा २४ घंटे बिजली और पानी की अबाध सप्लाई है जबकि आधा भारत अभी भी अंधकार मैं जीता है और कई राज्यों मैं सूखे जैसी स्थिति है | मीडिया इस तथ्य से भी आँख मीचे रहता है के कांग्रेस पार्टी सोनिया गाँधी की कभी प्रत्यक्ष और कभी परोक्ष सहमति से गेर कांग्रेसी राज्य सरकारों को गिराने के लिए करोडों रूपये लगा विधानसभा सदस्यों की खरीद-फरोख्त करने मैं लगी रहती है और कांग्रेसी राज्यपाल राज्यों मैं बेशर्मी से कानूनों को तोड़ मरोड़ के लोकतंत्र को बंधक बनाये हुए हैं |
क्या भारतियों को इस बात का अनुमान भी है के उनका राष्ट्र लोकतान्त्रिक देश से अर्ध-तानाशाही मैं बदल गया है जंहा देश का हर महत्वपूर्ण निर्णय एक महिला द्वारा लिया जाता है जो सुरक्षा कर्मियों और कुनबे के घिरी १० जनपथ की अपनी कोठी मैं भारतवर्ष की महारानी की तरह रहती हैं??
क्या भारतियों को मालूम है के सोनिया गाँधी आयकर दाताओं के दसियों अरब रुपयों पर अपना नियंत्रण रखती हैं जिसका प्रयोग वह अपनी पार्टी को सत्ता मैं बनाये रखने के लिए करती हैं? क्या वो जानते हैं देश मैं हुए बड़े बड़े घोटालों जैसे २जी, राष्ट्रमंडल खेल और आदर्श सोसाइटी आदि के पैसे का बड़ा हिस्सा काग्रेस पार्टी कि तिजोरी मैं गया है जिसका प्रयोग वो अगले लोकसभा चुनावों मैं अपने पुत्र राहुल को देश के सत्ताशीर्ष पर स्थापित करने मैं करेंगी?? भगवान का शुक्र है के न्यायपालिका अभी भी किसी हद तक स्वंतंत्र है ..
ऐसा लगता है कोई इस बात पर ध्यान नहीं दे रहा है कैसे सोनिया गाँधी के शासन मैं बहुत से वामपंथी बुद्धिजीवियों को खुलेआम देश मैं अलगाववाद फेलाने दिया जा रहा है और सरकार भारतीय सेना को कमजोर करने का निरंतर प्रयास कांग्रेस सरकार द्वारा किया जा रहा है | भारतीय सेना जो भारतीय सत्ता प्रतिष्ठान की एकमात्र ऐसी संस्था है जो अभी भी हजारों सालो की साहस, सम्मान और मात्रभूमि के प्रति निष्ठा की क्षत्रिय परम्परा का पालन कर रही है और सच्चे अर्थो मैं धर्मं निरपेक्ष है जिसमें हिंदू या मुस्लिम के आधार पर सेनिकों मैं कभी भेदभाव नहीं किए जाता और जो नाममात्र कि तनखाह पर देश के लिए अपनी सेवाएं और प्राण तक देते हैं ऐसे संस्था को हिंदू मुस्लिम जनगड़ना करा कर विभाजित करना और कश्मीर एवं लद्दाख मैं सेना कि उपस्थिति को कम करने जैसे कमजोर करने के प्रयास किये जा रहे हैं जिससे केवल पाकिस्तान और चीन को ही फायदा होगा |
अक्सर उन लोगों द्वारा जो सोनिया गाँधी को नजदीक से जानने का दावा करते हैं द्वारा उनकी व्यक्तिगत इमानदारी, सदाशयता और अपने निकट के लोगों का ख्याल करने की विशेषताओं कि बातें की जाती हैं पर सच्चाई ये है के ये असम्भव है के फ्रांस मैं किसी गेर-इसाई को फर्ज कीजिये किसी हिंदू को जो कि ना तो देश का राष्ट्रपति हो ना प्रधानमंत्री को परदे के पीछे से सर्वोच्च सत्ता का संचालन करने दिया जाए और उसकी सत्ता देश के चुने हुए प्रधानमंत्री से भी ऊपर हो, क्या कांग्रेस मैं कोई भी योग्य व्यक्ति नहीं जो ये जिम्मेदारी उठा सके?
क्या 1.2 अरब भारतीय अपने बीच से कोई व्यक्ति अपना देश चलाने के लिए नहीं चुन सकते जो भारत की जटिलताओं और यंहा के जीवन कि गूढ्ताओं को समझता हो और भारतीय भी हो ?? पर केवल ये ही नहीं सोनिया गाँधी कि भारतीय सत्ता शीर्ष पर उपस्थिति कई तरह कि द्रश्य और अद्रश्य शक्तियों को काम करने का मौका देती हैं हो भारत के लिए हानिकारक हैं |
वैसे मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ के पश्चिम के श्रेष्ठ मूल्यों को अपनाने की कोशिश करने मैं कोई हर्ज नहीं है जैसे – लोकतंत्र, तकनिकी उन्नति और उच्च जीवनस्तर आदि पर अंधानुकरण सही नहीं होगा क्यूंकि पश्चिम मैं बहुत से सामाजिक संस्थान और परम्पराएँ टूट और बिखर रही हैं जैसे – हर तीन मैं से २ शादियों का अंत तलाक मैं होता है, बच्चों मैं अति-हिंसा कि प्रवृत्ति, बुढ़ापे मैं आर्थिक एवं पारिवारिक सहारे का अभाव, यूवाओं के बड़े वर्ग मैं डिप्रेसन जैसी मानसिक समस्याएं आदि और पश्चिम इन समस्याओं का जबाब अन्य संस्कृतियों समाजों मैं खोजने कि कोशिश कर रहा है खासकर भारतीय संस्कृति मै |
अक्सर भारतीय खासकर युवा इस बात कि गंभीरता को नहीं समझ पाते कि कैसे हर कीमत पर उतावली मैं भारत के अंधे पश्चिमीकरण का प्रयास इस शासन मैं किया जा रहा है | सोनिया गाँधी और उनके सिपहसालारों को इस बात को समझने कि जरुरत है भारत मैं 85 करोड़ और पूरी दुनिया मैं 1 अरब हिंदू अभी भी हैं और पिछले १००० साल के विदेशी आक्रमणों से जो कुछ अच्छी बातें संस्कृति मैं शामिल भी हुई हैं पर ये हिंदू संस्कृति और आध्यात्म दर्शन ही हैं जो भारत को विशिष्ट बनाते हैं और यही सांस्कृतिक विशिष्टता ही भारतीय इसाइयों को यूरोपीय और अमेरिकेन इसाइयों और भारतीय मुस्लिमों को अरब के मुसलमानों से अलग करते हैं |
भारत का दुर्भाग्य है के ये लंबे समय तक गुलामी कि जंजीरों मैं जकड़ा रहा और चीन से अलग ये आज भी अपनी समस्याओं का समाधान पश्चिम मैं ढूंडने का कोशिश करता है और सोनिया गाँधी का सत्ताशीर्ष पर होना आधुनिक भारत की उसी मानसिक दासता का परिणाम है और इसलिए वो लोकतान्त्रिक छद्म वेशभूषा मैं भारत कि मलिका है|
* (लेखक पेरिस से छपने वाले ला नोउवेल्ले डेल’ इन्डे के प्रमुख संपादक हैं एवं कई किताबों के लेखक हैं जिनमें श्री श्री रविशंकर पर लिखी गयी द गुरु ऑफ जोय [हे हाउस पब्लिकेशन – 1,25,000 से ज्यादा प्रतियाँ 7 देशों मैं] प्रमुख हैं)

 

NEEM, THE GREEN GOLD THAT INDIA IGNORES

The Neem trees (Azdirachta Indica) have started to flower all over India. Small delicate white flowers that irradiate a subtle and beautiful scent. The Mother of Pondichery, who had given names to all the flowers, had called the flowers of the Neem tree, “Spiritual atmosphere””, for not only if you sit under a neem tree, insects are kept away by its natural repellent properties, but the soft fragrance of its flowers and the thick green umbrella of its leaves, produce an atmosphere that induces to peace and meditation.

 Since American firms such as WR Grace et Agridyne, have tried to patent Neem, the Indian Govt may have started realising that they may be sitting on a pile of gold. Or have they? Every third shop today in India is an allopathic medical store. Neem is one of the most neglected, underused, overlooked trees in India. Yet its properties are unique: its bark is wonderful against malaria and sometimes even early cancer; its oil extracted from its seeds and fruits is an excellent natural pesticide that has been used effectively to protect cashew nut flowers against insects (instead of the deadly pesticides that Tamil Nadu & Kerala farmers indiscriminately spray repeatedly). Its leaves, its seeds, its small branches, have unique medical properties that used to be known in India millenniums ago. “Neem is Shakti”, says Sri Sri Ravi Shankar, for it discriminates. An antibiotic kills the good and bad microbes, whereas neem only eliminates the bad and spares the good”.

 I have used neem for decades and it kept me healthy. Here a few simple easy to do yourself recipes:

1)    Pick up about 20 young neem leaves early morning, wash them under the tap and put them in a blender with a glass of fresh (or mineral) water. Blend for 3 or 4 minutes. Strain it and drink that wonderful deep green juice before breakfast (for those who find it too bitter, add some liquid jagry). It keeps away worms and amoebas, clears your blood and is good for the liver.

2)    Enema has become a dirty word today, but it’s a highly effective way of cleaning one’s intestines and getting rid of the poison that accumulates there, specially for the non-veg people. Pick up in the evening 2 or three whole young branches of neem. Wash them under the tap and boil them whole for an hour. Keep it covered for the whole night so it soaks well. You can administer yourself the enema in the morning in your own bathroom with a simple device that is cheap and easy to find in pharmacies. I recommend at least 3 repeats, 2 days in a row, four or five times a year.

3)    Pick up the seeds of the neem tree, dry them in the sun and put them in a blender with one or two block of rock salt. The brown powder that comes out is an excellent toothpaste, that is not only good for the teeth because of its antiseptic properties, but rubbed gently on the gums, protect & strengthen them, something that modern toothpastes do not do.

 Every time I see these adds on Indian TV, promoting some rubbish toothpaste or some miracle whitener (why do Indian girls crave for whiteness, when brown is so sexy and westerners spend billions in creams to get brown on their beaches?), it makes me mad. India has so much ancient medical knowledge still alive in Ayurveda and simple rural remedies such as neem, tulsi, oe Aloe Vera. We do hope that the craze for westernization that was also part of the Congress and Sonia Gandhi’s brief, will metamorphose in a return to the ancient roots with Mr Modi, while adopting all that is good in the West.

 Finally, in our Shivaji Maharaj Museum of Indian History, we have planted many neems and I a planning to have one station, while ascending to the main Museum (for the moment the seven buildings are on the lower side), where around a neem tree, its properties will be extolled in posters and films, in Marathi, Hindi and English. This will be my gratitude to the neem.

Meanwhile, once more, I appeal to your generosity : our Museum is a wonderful and unique project, which faces many difficulties, one of them being that most industrialists and rich individuals donate to education or hospitals, but are instantly wary of a private Museum, built by a French man (!), on Indian history, this most sensitive subject that has been falsified by the British and then kept under wraps (and Hindus vilified) by successive Congress Govts and by the historians associated by JNU, such as Romila Thapar and their correspondents in the West, like Wendy Doniger, Michael Witzel or Christophe Jaffrelot in France.

 I need five lakhs at the moment to finish the Ahilyabhai building and obtain permissions for the main structure. We have tax exemption. Those who wish to donate can do so electronically to the trust account below or send me a mail at fgautier@rediffmail.com. For our substantial donors, we will give one or two reproductions of our original paintings (which can be seen at fact-ndia.com), all exhibited in our Museum in Pune, which is open from 9AM to 6PM every day. Please ask your friends in Pune to visit it. We have aarti every morning in our Mata Bhavani shrine at 9.30AM. the address is: Shivaji Maharaj Museum of Indian History, ahead of Marathwada Engineering College, Shinde road, Wadgaon, Pune 47. Namaste. Francois Gautier

Foundation Against Continuing Terrorism (FACT)

Savings Account No: 04071450000237. IFCS code: HDFC0000407

HDFC Bank Ltd

Aside

As the sting operation by investigative website Cobrapost on the 1992 Babri Mosque demolition at Ayodhya, is released, I thought I could share this article on Ayodhya which I wrote in 1992 for the Mumbai newspaper Blitz  THE SYMBOL OF … Continue reading